गढ़वा,(झारखंड)। झारखंड की महत्वाकांक्षी मंईयां सम्मान योजना में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। प्रशासन ने योजना के तहत अनियमितता बरतने वाले तीन सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) संचालकों के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त शेखर जमुआर ने खरौंधी प्रखंड में इस योजना के तहत गड़बड़ी करने वालों पर यह सख्त कदम उठाया है।
खरौंधी प्रखंड में कार्रवाई:
खरौंधी में तीन सीएससी संचालकों पर महिलाओं के लाभ में अनियमितता के आरोप साबित हुए हैं, जिसके चलते उनके लाइसेंस निरस्त कर दिए गए। यही नहीं, अबुआ आवास योजना में अयोग्य लाभुकों को आवास आवंटित करने के मामले में पंचायत सचिव शशि कुमार को भी निलंबित कर दिया गया है।
पहले भी हुए हैं गड़बड़ी के मामले:

यह पहली बार नहीं है जब मंईयां सम्मान योजना में गड़बड़ी की खबर आई है। इससे पहले एक सीएससी संचालक ने खुद को योजना का लाभार्थी दिखाकर इसका फायदा उठाया था, जिससे ब्याज सहित राशि वसूल की गई थी।
चुनावी वादे और योजना का महत्व:
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को हर महीने ₹2500 देने का वादा किया था। सरकार बनने के बाद उन्होंने इस वादे को निभाते हुए महिलाओं के खातों में दो महीने की एकमुश्त किश्त भेजी। योजना के तहत अगले महीने महिलाओं के खातों में राशि ट्रांसफर की जानी है, लेकिन गड़बड़ी के ये मामले सरकार के लिए चुनौती बन गए हैं।
जिला प्रशासन की सख्ती:

उपायुक्त शेखर जमुआर ने स्पष्ट किया है कि ऐसी गड़बड़ियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। इस घटना के बाद राज्य सरकार भी योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नई रणनीतियों पर विचार कर रही है।
झारखंड की मंईयां सम्मान योजना राज्य की महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने का एक बड़ा प्रयास है। लेकिन गड़बड़ी के ये मामले प्रशासन और सरकार के लिए चेतावनी हैं कि योजना की सख्त निगरानी सुनिश्चित की जाए। महिलाओं को सही समय पर लाभ मिल सके, यह राज्य सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
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