नई दिल्ली। भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने चेनाब नदी के जल प्रवाह को रोकने का बड़ा कदम उठाया है। यह फैसला सिंधु जल संधि से भारत के औपचारिक रूप से अलग होने के महज 10 दिन बाद आया है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 हिंदू पर्यटकों की निर्मम हत्या हुई, उसके बाद भारत की ओर से यह अब तक की सबसे निर्णायक रणनीतिक प्रतिक्रिया मानी जा रही है।
बगलिहार डैम के फाटक बंद, पाकिस्तान में पानी की आपूर्ति पर असर
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत ने जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में स्थित बगलिहार जलविद्युत परियोजना के फाटकों को बंद कर दिया है। इस परियोजना को ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ तकनीक से बनाया गया था, जिससे नदी के प्रवाह को बिना रोके विद्युत उत्पादन होता रहा है। लेकिन अब पहली बार भारत ने डैम के गेट बंद कर पानी को रोकना शुरू किया है, जिससे चेनाब नदी के पाकिस्तान की ओर बहने वाले जल में बड़ी कटौती देखी जा रही है।
सिंधु जल संधि: ऐतिहासिक समझौते पर भारत का पुनर्विचार
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से बनी सिंधु जल संधि के तहत भारत को तीन पूर्वी नदियों—रावी, ब्यास और सतलज—का जल उपयोग करने का अधिकार है, जबकि चेनाब, झेलम और सिंधु नदियों का बहाव पाकिस्तान को सौंपा गया था। भारत सिर्फ बिजली उत्पादन के लिए पश्चिमी नदियों का उपयोग कर सकता था, लेकिन मौजूदा कदम संधि से पूर्णत: बाहर निकलने का संकेत देता है।
पाकिस्तान में सिंचाई संकट की चेतावनी
चेनाब नदी का पानी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की कृषि व्यवस्था की रीढ़ है। वहां के जल संसाधन विभाग ने चेताया है कि यदि पानी की आपूर्ति में इस तरह की कटौती जारी रही, तो अगले कुछ हफ्तों में सिंचाई संकट खड़ा हो सकता है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान की ओर जाने वाली जलधारा में 40-50% की गिरावट दर्ज की गई है।
किशनगंगा डैम पर भी तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार झेलम नदी पर स्थित किशनगंगा डैम से भी पाकिस्तान की ओर पानी छोड़ने की व्यवस्था पर पुनर्विचार कर रही है। यह कदम भी रणनीतिक दबाव बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है।
सैन्य स्तर पर बढ़ती तैयारी
पानी पर कूटनीतिक कार्रवाई के साथ-साथ भारत ने समुद्री सीमाओं पर भी अपनी स्थिति मज़बूत की है। अरब सागर में भारतीय नौसेना युद्धाभ्यास कर रही है, जिसमें मिसाइल फायरिंग से लेकर पनडुब्बी गतिविधियां शामिल हैं। उधर पाकिस्तान ने अब्दाली मिसाइल का परीक्षण कर तनाव को और हवा दी है। भारत के रक्षा विशेषज्ञ इसे “चुनौती का जवाब देने की क्षमता” के रूप में देख रहे हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
भारत में सरकार के इस फैसले को लेकर राजनीतिक गलियारों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। सत्तारूढ़ दल इसे “आतंक के खिलाफ जल युद्ध” बता रहा है, वहीं कुछ विपक्षी नेता इस कदम को खतरनाक बताते हुए संयम बरतने की सलाह दे रहे हैं।
भारत द्वारा चेनाब नदी का जल प्रवाह रोकने की कार्रवाई केवल एक पर्यावरणीय या तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक भू-राजनीतिक संदेश भी है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अब केवल सैन्य ही नहीं, जल नीति के ज़रिए भी पाकिस्तान की आतंकवाद नीति पर जवाबी कार्रवाई करने को तैयार है।











Leave a Reply