चतरा: झारखंड के चतरा जिले में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां अवैध रूप से गर्भपात कराकर नवजात शिशु को बेचने की खबर ने प्रशासन को सख्त कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया। सिमरिया थाना परिसर के पीछे संचालित संजीवनी नर्सिंग होम में गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की गई, जहां अवैध गर्भपात और नवजात शिशु की खरीद-फरोख्त का मामला उजागर हुआ। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नर्सिंग होम को सील कर दिया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।
गुप्त सूचना पर हुई छापेमारी
अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) सन्नी राज और अंचलाधिकारी (सीओ) गौरव कुमार के नेतृत्व में संयुक्त छापेमारी की गई। अधिकारियों को सूचना मिली थी कि नर्सिंग होम में एक अविवाहित महिला का सात माह का गर्भपात कराया गया और उसके स्वस्थ नवजात को 5 लाख रुपये में बेचा गया। जब प्रशासनिक टीम ने अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो यह स्पष्ट हुआ कि महिला का प्रसव हुआ था। हालांकि, नवजात शिशु की वर्तमान स्थिति को लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है।
नर्सिंग होम अवैध, गर्भपात में एएनएम शामिल
जांच में यह भी पाया गया कि संजीवनी नर्सिंग होम का कोई वैध पंजीकरण नहीं है और वहां अवैध रूप से गर्भपात किया जा रहा था। पूछताछ के दौरान इस घिनौने कृत्य में शामिल एएनएम विभा कुमारी और नर्सिंग होम संचालक सुदर्शन कुमार उर्फ सुमन कुमार का नाम सामने आया। एएनएम विभा कुमारी ने कबूल किया कि गर्भपात के बाद नवजात का शव हजारीबाग मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार कर दिया गया। हालांकि, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका कि नवजात की मौत गर्भपात के दौरान हुई थी या उसके बाद उसे मार दिया गया।
प्रशासन ने दर्ज की प्राथमिकी, जांच जारी
इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन सख्त हो गया है। सीओ गौरव कुमार ने कहा,
“नर्सिंग होम में अवैध रूप से गर्भपात और नवजात की बिक्री का मामला बेहद गंभीर है। एएनएम ने गर्भपात की बात स्वीकार की है, लेकिन नवजात को हजारीबाग ले जाकर अंतिम संस्कार करने की वजह स्पष्ट नहीं है। मामले की गहन जांच की जा रही है, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि क्या यह मामला पहली बार हुआ है, या इसके पहले भी नवजात शिशुओं की खरीद-फरोख्त की घटनाएं इस नर्सिंग होम में होती रही हैं।
कानूनी प्रावधान और प्रशासन की सख्ती
अधिकारियों के अनुसार, बिना पंजीकरण के किसी भी अस्पताल को गर्भपात कराने या भ्रूण जांच करने की अनुमति नहीं है। यदि गर्भपात के बाद नवजात की मौत होती है या उसे मार दिया जाता है, तो मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट, 1971 और आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
संजीवनी नर्सिंग होम पर लगे ताले, दोषियों की तलाश जारी
प्रशासन ने संजीवनी नर्सिंग होम को सील कर दिया है और संचालक व एएनएम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट में और कौन-कौन शामिल है और नवजात शिशु की बिक्री के पीछे कौन लोग हैं। इस संवेदनशील मामले को लेकर पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है, वहीं प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि इस तरह की घटनाएं पहले भी हुई हैं या नहीं।
क्या कहते हैं जानकार?
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध गर्भपात और नवजात की बिक्री एक गंभीर अपराध है, जो संगठित गिरोहों के तहत संचालित हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को चाहिए कि इस तरह के नर्सिंग होम्स पर कड़ी निगरानी रखी जाए और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए।
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