बीजापुर/कांकेर। छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों ने एक बार फिर नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। बीजापुर और कांकेर जिले में गुरुवार सुबह दो अलग-अलग मुठभेड़ों में कुल 24 नक्सली मारे गए, जबकि डीआरजी का एक जवान शहीद हो गया। इन ऑपरेशनों में सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में ऑटोमेटिक हथियार, गोला-बारूद और नक्सली सामान बरामद किया है।
बीजापुर में सबसे बड़ी कार्रवाई, 20 नक्सली ढेर
बीजापुर जिले के गंगालुर थाना क्षेत्र में बीजापुर जिला रिजर्व गार्ड (DRG) और अन्य सुरक्षाबलों की एक संयुक्त टीम ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाया। यह मुठभेड़ बीजापुर और दंतेवाड़ा की सीमा से सटे तोड़का एंड्री के जंगलों में हुई। सुबह करीब 7 बजे से दोनों ओर से भारी गोलीबारी शुरू हो गई, जिसमें सुरक्षाबलों ने 20 नक्सलियों को मार गिराया।
हालांकि, इस ऑपरेशन में डीआरजी का एक जवान शहीद हो गया। सुरक्षाबलों ने घटनास्थल से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया है।
कांकेर में भी बड़ी सफलता, 4 नक्सली मारे गए
दूसरी ओर, कांकेर जिले में भी सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। इसमें 4 नक्सली मारे गए और उनके शव बरामद कर लिए गए हैं। कांकेर में भी सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में हथियार और अन्य सामग्री जब्त की है।
नक्सलवाद के खात्मे की ओर बड़ा कदम
गृह मंत्री अमित शाह ने इन अभियानों को “नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में बड़ी उपलब्धि” बताया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की “रुथलेस अप्रोच” (निर्मम रणनीति) के तहत नक्सलवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है।
अमित शाह ने यह भी घोषणा की कि अगले साल 31 मार्च से पहले देश को नक्सलमुक्त बना दिया जाएगा।
सुरक्षाबलों के आक्रामक तेवर, नक्सलियों की कमर टूटी
छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में सुरक्षाबलों की आक्रामक कार्रवाई ने नक्सलियों को बैकफुट पर ला दिया है। पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों नक्सली ढेर किए जा चुके हैं और कई शीर्ष कमांडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
सरकार की समर्पण और पुनर्वास नीति के बावजूद जो नक्सली हिंसा का रास्ता नहीं छोड़ रहे, उनके खिलाफ सुरक्षाबलों ने युद्धस्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। बीजापुर और कांकेर की ताजा मुठभेड़ इस बात का सबूत है कि अब नक्सलवाद के दिन गिने-चुने रह गए हैं।
क्या नक्सलवाद का अंत नजदीक है?
विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में लगातार हो रही बड़ी कार्रवाई इस बात का संकेत है कि नक्सलवाद का अंत अब दूर नहीं। सरकार की रणनीति और सुरक्षाबलों की आक्रामकता से नक्सली संगठनों की शक्ति कमजोर होती जा रही है।
अगर यही गति बनी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ समेत पूरा देश नक्सल मुक्त हो जाएगा।
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